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गर्मियों में तोरई की खेती से ले 200 क्विंटल तक ले पैदावार, ये है 5 उन्नत किस्में, आलू की खुदाई के बाद उगाकर कमा सकते हैं लाखों.

Torai ki kheti : तोरई की खेती 50 दिनों में भारी पैदावार लेने हेतु किसान आलू की फसल पकने एवं खुदाई के बाद बुवाई कर सकते हैं, इसके लिए आज के इस लेख में हम तोरई की प्रमुख 5 उन्नत किस्मों के बारे में विस्तार से जानेंगे, इसके अलावा तोरई की पैदावार, निराई गुड़ाई, खाद बीज एवं उर्वरकों सहित अन्य जानकारी इसमें आपको बताएंगे ताकि किसानों को बंपर लाभ मिल सकें..

किसान इस समय आलू की कटाई के बाद तोरई की 50 दिनों में पकने वाली किस्मों की खेती करके भरपूर मात्रा में लाभ कमा सकते हैं, इसके लिए किसान इन पांच उन्नत किस्मों की बुवाई कर सकते हैं, जो सिर्फ 50 दिन बाद ही 200 क्विंटल तक पैदावार देने में सक्षम मानी जाती है, इसमें 2 महीने से कम समय में ही किसान अच्छा मुनाफा ले सकते हैं. इसके बारे में एक्सपर्ट्स की क्या राय है आइए जानते हैं..

तोरई की खेती हेतु 5 किस्में एवं एक्सपर्ट की राय?

तोरई की खेती करने किसानों के लिए यह अच्छा मौका है क्योंकि किसान आलू के बाद इसकी खेती की जानकारी से भापूर लाभ ले सकते हैं, इसके बारे में जिला उद्यान अधिकारी डॉक्टर पुनीत कुमार पाठक ने कहा कि किसान तोरई की खेती हेतु उन्नत बीजों का चयन करके अच्छा मुनाफा ले सकते हैं, इसके लिए उन्नत बीज का चयन आवश्यक है ।

तोरई की ये 5 उन्नत किस्में कौन सी हैं?

जिला उद्यान विभाग के अधिकारी डॉक्टर पुनीत सिंह पाठक कहते हैं कि किसान निम्न तोरई की किस्मों को खेत में इस्तेमाल करके अच्छा मुनाफा ले सकते है जो निम्न प्रकार से है..

1. तोरई की किस्म कल्याणपुर हरी चिकनी
2.तोरई की पंत चिकनी तोरई 1 किस्म
3. तोरई की पूसा चिकनी किस्म
4. तोरई की काशी दिव्या किस्म
5. तोरई की पूसा सुप्रिया किस्म

अब एक एक किस्म के बारे में इन सभी पांच तोरई की उन्नत किस्मों की क्या क्या खासियत है एवं पकने से लेकर उत्पादन तक की संपूर्ण जानकारी आपको बताते हैं. जो इस प्रकार है.

1. तोरई की किस्म कल्याणपुर हरी चिकनी की विशेषताएं :- यह तोरई की किस्म चंद्रशेखर आजाद कृषि विश्वविद्यालय कानपुर द्वारा विकसित की गई है जो तोरई की सबसे लोकप्रिय किस्मों में से एक है, इस किस्म के फल माध्यम आकार में गुद्देदार एवं पतले होते हैं, जो तकरीबन पकने में 60 से 70 दिन का समय लेते हैं, वही इस किस्म से किसान 200 से अधिक कुंतल तक उत्पादन ले सकते हैं, जो अन्य किस्मों की बजाय अधिक है।

2.तोरई की पंत चिकनी तोरई 1 किस्म की विशेषताएं:- तोरई की इस किस्म से किसान 150 से 170 क्विंटल तक पैदावार ले सकते हैं, गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, पंतनगर द्वारा इस किस्म को विकसित करने का श्रेय जाता है, जो मात्र 50 से 55 दिन में पककर तैयार हो जाती है, इसके फल की बात करे तो इसके फल बेलनाकार, हरे एवं लंबे आकार के होते हैं।

3. तोरई की पूसा चिकनी किस्म की विशेषताएं:- तोरई की इस उन्नत की खास विशेषता यह है कि इसका किसान 150 से 200 क्विंटल तक उत्पादन ले सकते हैं जो सिर्फ तुड़ाई हेतू 50 से 55 दिन में तैयार हो जाती है , यह किस्म भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI) द्वारा विकसित द्वारा विकसित की गई है, जिसका आकार मध्यम, बेलनाकार , हरा एवं फल चिकना होता है।

4. तोरई की काशी दिव्या किस्म की विशेषताएं:- रोगों के प्रति प्रतिरोधी किस्मों में यह प्रमुख तोरई की किस्म है, जिसको भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान, वाराणसी द्वारा विकसित किया गया है, इसके फलों का आकार मध्यम, पतला एवं गुद्देदार प्रकार का होता है जो 60 दिनों में पक जाती है, उत्पादन के लिहाज से यह किस्म 130 से 160 कुंटल तक दे सकती है, किस्म डाउनी इमलड्यू रोग के प्रति सहनशील है।

5. तोरई की पूसा सुप्रिया किस्म की विशेषताएं:- इस किस्म को विकसित करने का श्रेय भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI) को जाता है जो मात्र 50 दिन में पक जाती है, उत्पादन के लिहाज से भी यह किस्म उच्च उत्पादन हेतु एक अच्छी किस्म मानी जाती है, इसके फल चिकने आकार मध्यम प्रकार के एवं हरे रंग के बनते हैं, इस किस्म हेतु आर्द्र एवं गर्म जलवायू उपयुक्त रहती है, जो रोगों के प्रति सहनशील भी है।

तोरई की खेती हेतु तापमान एवं मिट्टी?

किसान तोरई की खेती करने की सोच रहे हैं वह किसान मिट्टी की जांच अवश्य करवा ले क्योंकि तोरई की खेती हेतु 6.5 से 7.5 ph मान वाली मिट्टी आवश्यक मानी गई है, इसके अलावा किसान इसकी खेती 25 से 37 डिग्री सेल्सियस तक के तापमान में कर सकते हैं, किसानों को सलाह दी जाती है कि इसकी खेती हेतु जल निकासी अच्छी हो एवं उच्च कार्बनिक पदार्थों से युक्त उपजाऊ भूमि हो। इस मिट्टी एवं जलवायु में किसान इसकी खेती से 150 से 200 क्विंटल तक पैदावार ले सकते हैं।

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