अपनी आवाज:- Paddy Insects control | किसान साथियों इस समय सितंबर माह चल रहा है एवम् धान की फसल की बुवाई तकरीबन 40 से 50 दिन की हो चुकी है, ऐसे मैं इसमें अनेक प्रकार के रोग कीट पतंग एवम् बिमारिया हों रही है। हालांकि इस समय कई स्थानों पर बारिश भी देखने को मिल रही है, जिसका फायदा धान मैं हो रहा है।
किसान भाइयों खरीफ सीजन में धान की बुवाई बीते सालों की बजाय अधिक बताई जा रही है, क्योंकि इस बार अच्छी बारिश हुई है एवं हरियाणा राजस्थान उत्तर प्रदेश बिहार बंगाल पंजाब मध्य प्रदेश हिमाचल आदि राज्यों में बंपर बॉय के साथ अच्छी उत्पादन देने की बात इस साल कहीं जा रही है । Paddy Insects control
हालांकि इस समय कई स्थानों पर धान की फसल बलिया निकलने लगी है एवं कई प्रकार के रोग Paddy Insects control होने का खतरा इसके साथ बढ़ गया है इसमें इस समय अनेक प्रकार के रोग फैलने के कारण उत्पादन पर असर भी देखने को मिल सकता है जिसके बारे में कृषि विभाग ने इन लोगों के बारे में बताया है किस प्रकार इन रोगों को नियंत्रित किया जाए तो इस लेख में आज हम इसके बारे में विस्तार से जानेंगे ताकि उत्पादन में गिरावट ना हो।
किसान भाइयों इस समय जब धान की फसल 45 से 60 दिन की हो गई है, तो किसान साथी क्या क्या रोगों Paddy Insects control एवम् कीटो से कैसे बचाव करें एवम् क्या क्या उपाय करें, इसके लिए किसान समय समय पर खेतों का निरीक्षण करते हुए, यह ध्यान दें कि इस समय किसी प्रकार की कोई बीमारी, कीट और रोग तो नही है, क्योंकि इस समय सितंबर माह में अचानक बीमारियां आने लगती है एवम् बाली बनते समय यह तैयार फ़सल को जल्दी खराब कर देती है।
इस समय सितंबर महिने में धान के किसानों को किन किन बातों की तरफ ध्यान देना चाहिए इसके बारे में कृषि वैज्ञानिकों Paddy Insects control द्वारा एडवाइजरी जारी की है, यह सलाह क्या है आईए इस लेख में हम विस्तार से जानें…
धान के प्रमुख रोग एवम् रोकथाम के उपाय | Paddy Insects control
धान की फसल में कई प्रकार के रोग कीट एवम् खरपतवार हो जाते हैं जिनको समय पर नियन्त्रण न किया जाए तो यह संपूर्ण फसल को बर्बाद कर सकते हैं, ऐसे में वो कोन कोन से रोग है चलिए जानते हैं..
1.झोंका रोग
2.भूरा फुदका किट
3.धान में खैरा रोग
4.धान में गंधी रोग
उपरोक्त धान के प्रमुख रोग हो जाते हैं जिनके बचाव Paddy Insects control एवम् क्या क्या उपाय किए जाएं, विस्तार से लक्षण एवम् नियंत्रण हेतु क्या क्या उपाय किसान कर सकते हैं, विस्तार से एक एक देख लेते हैं…..
(A) धान की फसल में झोंका रोग एवम् इसके रोकथाम हेतु उपाय | Blight disease in paddy crop and measures to prevent it
( i.) . झोंका रोग के लक्षण
Paddy Insects control | धान की फसल में 45 से 60 दिन होने पर इसकी पत्तियों पर आंख जैसे धब्बे बनने लगते हैं, जो बीच के भाग में राख जैसे और किनारे की साइट में कत्थई रंग जैसे दिखाई देते हैं, इसके अलावा इसकी बालियां, डंठलों, पुष्प, शाखाओं एवं गांठो पर भी काले धब्बे जैसे बनते हैं।
(ii.) . झोंका रोग के रोकथाम हेतु उपाय
किसान भाइयों झोंका रोग के रोकथाम हेतु कार्बेडाजिम 50% WP दवाई 500 ग्राम मात्रा एवम् मैंकोजेब / जिनेब 75% WP की 2 किलो ग्राम / हेक्टेयर की दर से आप 500/700 लीटर पानी में मिलाकर इसका छिड़काव खेत में कर दे।
(B) धान की फसल में भूरा फुदका किट रोग कारण एवम् निवारण | Causes and prevention of brown hopper disease in paddy crop
( i.) . भूरा फुदका किट (हॉपर बर्न) के लक्षण
Paddy Insects control | भूरा फुदका किट के लक्षण के पहचान हेतु बात करें तो इसमें कीट के पोढ़ भूरे रंग के पंखसहित एवम् शिशु पंखहीन भूरे रंग के होते हैं, इसके कीट पोधे के पौढ एवम् तथा शिशु दो कीट पत्तियों और कल्लो का रस चूसकर धान की फसल को नुकसान पहुंचा सकते हैं। शुरुवाती दौर में गोलाई में पौधे काले पड़कर सूखने लगते हैं।
(ii.) . भूरा फुदका किट नियंत्रण हेतु उपाय
भूरा फुदका किट नियंत्रण के लिए किसान साथी इसके कार्बोफ्यूरान 3 CG की 25 किलो मात्रा प्रति हेक्टेयर एवम् क्लोरपाइरीफास 20% EC को 1.50 ली. एक हेक्टेयर भूमि पर 500 से 600 लीटर पानी में डालकर खेत में डाले
(C) धान में खैरा रोग (khaira disease) लक्षण और उपचार
( i.) .धान में खैरा रोग लक्षण
Paddy Insects control | यह रोग तराई क्षेत्र की 1955 से धान की फसल में बड़ी समस्या बनी हुई है, धान में यदि जस्ते की मात्रा कम हो जाती है, उस समय यह रोग ज्यादा धान में नुकसान पहुंचा सकता है, धान में कई बार खेरा रोग (khaira disease )का प्रकोप बढ़ने लगता है जिसकी पतिया सबसे पहले पीले रंग के धब्बे और बाद में ये धब्बे कत्थई रंग के बनने लगते हैं। इसकी व्याप्ति कम एवम् आकार बोने प्रकार के रह जाते हैं। यह रोग पौधे की बुवाई के 15 से 20 दिन बाद लगने लगता है। जिसके कारण सबसे अधिक प्रभावित इसके विकास, पुष्प,, फल और परागण प्रभावित होने लगता है।
(ii.) . धान में खैरा रोग के उपचार हेतु उपाय | treatment of Khaira disease in paddy
धान की फसल में खेरा रोग के उपाय हेतु किसान फेरोमोन ट्रैप (SB lyor) का प्रयोग कर सकते है, इसके अलावा आप क्यूनालफ़ास 25% EC, क्लोरपाइरीफ़ास 20% EC, अथवा फ़िप्रोनिल (Fifronil) 5% SC का प्रयोग कर सकते हैं।
(D) धान में गंधी रोग लक्षण और उपचार के उपाय | Symptoms and treatment measures of odorous disease in paddy
( i.) . धान की फसल में गंधी रोग के लक्षण
यह कीट मुख्यतः मध्य और दक्षिण अमेरिकी मूल का प्रमुख रोग है, जिससे धान के पौधे के डंठल में लगने वाला गंधी कीट टिब्राका लिंबैटिवेंट्रिस कहा गया है, धान के अतिरिक्त यह रोग अन्य फसलों जैसे टमाटर गेहूं और सोयाबीन की फसल में लगता है, जो सम्पूर्ण तैयार फसल को नष्ट कर सकता है।
(ii.) . गंधी रोग के नियन्त्रण हेतु उपाय
किसान भाइयों यह कीट पुरानी फसल की कटाई के बाद खेत से बाहर जबकि बुवाई के बाद फिर से खेत में प्रवेश कर जाता है, जो कीटभक्षी एवम् वयस्क पौधे यानी दोनो प्रकार के पौधे खाने लगता है, यह कीट पोधे के ऊपर बैठकर रस को चूसने लगता है, ओर इसके दाने को प्रभावित करने लगता है, ओर पौधे में नाइट्रोजन को रोक देता है।
इस गंधी रोग के रोकथाम हेतु किसान मैलाथियान 5% को 25 किलो प्रति हैक्टेयर के हिसाब से खेत में बिखरा देवे। किसान मिथाइल पैराथियान 2% की घुल को 25 किलो प्रति के अनुसार बिखरावे।
इसके अलावा किसान साथी धान की फसल में एमिडाक्लोप्रिड 17.8 फीसदी , 0.300 लीटर/हेक्टेयर मात्रा को 500-600 लीटर पानी के साथ स्प्रे कर देवे, थायामेथोक्साम 25% डब्लूजी 40 ग्राम/एकड़ का छिड़काव 500 लीटर पानी में घोल कर इसका स्प्रे के रूप में इस्तेमाल कर सकते हैं। Paddy Insects control
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