Apni Aawaj

धान की फसल में ज्यादा पैदावार लेना है तो कीट एवं रोगों से बचाव हेतू ये करें उपाय

धान को खरीफ सीजन में घास कीट और रोगों का इलाज एवं दवाई का इस्तेमाल| Paddy farming in kharif

Paddy farming in kharif | किसान साथियों इस समय हरियाणा राजस्थान पंजाब एमपी यूपी बंगाल बिहार उड़ीसा एवं छत्तीसगढ़ समेत देश के विभिन्न क्षेत्रों में तक़रीबन खरीफ धान की बुवाई लगभग पूरी हो चुकी हैं, ऐसे में इस समय अनेक प्रकार के कीट पतंग एवं रोग लगने का खतरा बढ़ गया है ।

इसके लिए किसानों को इन रोगों और कीटो एवं अन्य प्रकार के नुकसानदायक चीजों से कैसे बचाव किया जाए, इसके बारे मे संपूर्ण जानकारी आपके साथ इस वेबसाइट पर देने वाले है ताकि किसानों को किसी भी प्रकार की जानकारी से वंचित ना होना पड़े, एवं धान की फसल में अच्छा मुनाफा कमाया जा सके। तो किसान भाइयों चलिए इस लेख में हम जान लेते हैं धान की फसल में रोगों को कैसे बचाएं…

भारत में बात करे खरीफ सीजन की तो बुवाई के मामले में सभी प्रकार की फसलों जैसे नरमा कपास मूंग ग्वार सोयाबीन मक्का जैसी फसलों की बजाय Paddy farming in kharif धान की बुवाई क्षेत्र सबसे अधिक है, क्योंकि भारत में मानसून के दौरान सबसे अधिक प्रभावित धान की फसल होती है जिसके कारण अधिक पानी की मात्रा के चलते लगभग संपूर्ण भारत में इसकी खेती होती है , चाहे उतर भारत हो या पूर्वी, मध्य एवं दक्षिण भारत हो ।

हालांकि भारत के कुछ राज्यों जहां पानी की कम मात्रा उपलब्ध है, वहां पर इसकी खेती करना मुश्किल होता है, इसलिए राजस्थान के मरुस्थल, हरियाणा के दक्षिण जिलों पश्चिमी उतर प्रदेश, गुजरात के कुछ स्थानों पर इसकी खेती करना मुश्किल है । बाकी देश के अन्य क्षेत्रों में इसकी खेती आसानी से की जा सकती हैं, मानसून की वजह से देश में बाढ़ वाले स्थानों पर इसकी पैदावार भी अच्छी ली जा सकती हैं, इसके अलावा देश के कुछ स्थानों पर नहर एवं कुओं के माध्यम से भी धान की खेती की जा सकती है।

किसान साथियों देश भर के किसान कृषि सीजन में धान की फसल बोते समय बंपर पैदावार हेतु अनेक प्रकार के उपाय करते हैं जैसे कि धान की फसल में कीट एवं रोग से बचाव करना इसके अतिरिक्त किसानों द्वारा इन कीटों को नियंत्रित करने हेतु खेत की जुताई मैडम की छंटाई एवं विकास की सफाई आदि प्रमुख उपाय हैं हालांकि इसके बावजूद भी कई प्रकार के रोग धान की फसल में हो जाते हैं जो उत्पादन पर काफी प्रभाव डालते हैं एवं उत्पादन गिरने लगता है इसके लिए आसान एवं उपयुक्त उपाय क्या हो सकते हैं, इसके बारे में विस्तार से इस लेख में चलिए जानते हैं ताकि अधिकतम उत्पादक किसानों द्वारा लिया जा सके।

 

इस साल धान की बुवाई बीते सालों की बजाय अधिक बताई जा रही है, इसका प्रमुख कारण अधिक मानसून सक्रियता बताया गया है, अतः ज्यादा पैदावार के लिए कीट एवं रोग के क्या उपाय है जानते हैं…

इन सभी प्रकार के कीटो एवं रोगों एवं खरपतवारों से बचाव हेतू भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद द्वारा धान की फसल में कैसे उपाय करें इसके बारे मे कुछ सुझाव जारी किए हैं, यानि कृषि विभाग की इन सभी सलाह एवं उपाय को इस्तेमाल करके आसानी से इनसे छुटकारा पा सकते हैं.

ये है धान में प्रमुख रोग

Paddy farming in kharif | किसान साथियों धान की फसल में कई प्रकार के रोग होते है जो सारी की सारी खड़ी फसल को बर्बाद कर सकती है, इसलिए किसानों को इन रोगों की जानकारी अच्छे से होना बहुत जरूरी है, ताकि समय पर इनका पता चलने पर इनमें उपयुक्त दवाओं का इस्तेमाल करके इन पर नियंत्रण किया जा सके। साथियों धान के प्रमुख रोगों में खैरा रोग, झोंका, जीवाणु धारी, भूरा धब्बा, सफ़ेद रोग, विषाणु झुलसा,शीथ झुलसा आदि रोग होते है इसलिए किसानों को इनके नियंत्रण हेतु उपाय करने चाहिए।

धान में रोगों से बचाव हेतू क्या करें?

Paddy farming in kharif | किसान साथियों को खरीफ सीजन में धान की बुवाई से पहले अच्छे से खेत की जुताई एवं मेढ़ो पर घास को साफ कर देना चाहिए, ताकि पिछली यानी रबी फसलों से उत्पन्न कीट एवं खरपतवार और रोग खत्म हो जाए। इसके साथ साथ किसानों को कृषि विशेषज्ञ की सलाह है कि धान की बुवाई हेतु उन्नत एवं प्रमाणित बीज की है बुवाई करें। जिनकी रोग प्रतिरोधकता अच्छी हो।

इसके अलावा किसानों को बीज शोधन करके ही धान की नर्सरी तैयार करनी चाहिए इस बात का किसानों को विशेष ध्यान रखना चाहिए ताकि उगते समय पौधा स्वच्छ पैदा हो, किसानों को इसके लिए बीज उपचार करने हेतु 3 ग्राम थीरम प्रति किलों बीज में डालकर करना चाहिए। इसके अतिरिक्त किसानों को धान के 1.50 ग्राम में 1.50 ग्राम कार्बेन्डाजिम , प्रति किलोग्राम धान में उपचारित करना चाहिए।

जिन स्थानों पर झुलसा रोग का प्रकोप अधिक रहता है उन स्थानों हेतु 25 किलोग्राम बीज की मात्रा में 38 ग्राम एमईएमसी (MEMC) एवं 4 ग्राम स्ट्रेप्टोसाईक्लीन को 45 लीटर पानी की मात्रा में बीज को भिगोकर एक रात रख दें। इसके बाद सुखाकर इन बीज को नर्सरी में बुवाई करें। इसके अतिरिक्त किसानों को इसमें 20 किलों यूरिया,5 किलो जिंक सल्फेट को 1 हज़ार लीटर पानी की मात्रा में घोलकर छिड़काव करें।

 

किसानों को अपने क्षेत्र के अनुसर ही धान की फसल बुवाई से पहले उन्नत एवं उपयुक्त प्रजाति का चुनाव करना चाहिए। इसके अलावा किसानों को आखिरी पौध शोधन हेतु 2.5 किलो प्रति हैक्टेयर ट्राइकोडर्मा के साथ 60 या 80 किलो गोबर खाद का इस्तेमाल करना चाहिए, एवं अच्छे से जुताई करें। Paddy farming in kharif

धान की फसल में कौन से कीट होते है?

Paddy farming in kharif | खरीफ सीजन में धान की फसल में अनेक प्रकार के रोग एवं कीट उत्पन्न हो जाते हैं जिनमें प्रमुख कीट की बात करें तो दीमक, पति लपेट, गंदी बग, तना बेधक (तना छेदक), सैनिक कीट आदि होते है। जो खड़ी फसल को नुकसान पहुंचा सकते हैं।

धान की फसल में खरपतवार नियंत्रण कैसे करें?

धान की फसल में अनेक प्रकार के खरपतवार होते हैं जो फसल के फ़ुटाव एवं बढ़वार को रोक देते हैं जिसके कारण उत्पादन में गिरावट आ सकती हैं। इसके नियंत्रण हेतु सबसे पहले स्वच्छ उर्वरकों का उपयोग करना चाहिए, इसके अलावा धान की अगेती फसल में स्वच्छ बीज एवं स्वच्छ पौध नर्सरी में इस्तेमाल करे। खरपतवार निरोधक उन्नत बीज का उपयोग करें। इसके अलावा 20 गुणा 20 की दूरी पर पौधे की रुपई करें। फसल की बुवाई से पहले संपूर्ण खेत से अवशेष का अच्छे से निपटारा करें।

धान की बुवाई के दौरान किसान 1.5 लीटर प्रति हैक्टेयर नीम आधारित कीटनाशक का इस्तेमाल करें। इसके बाद किसान साथी क्यूनालफास 25 ईसी को 1.25 लीटर या फिर क्लोरोपईरीफास 20 ईसी को 1.5 लीटर प्रति हैक्टेयर का उपयोग करें। Paddy farming in kharif |

ये भी जाने 👉खेती में जिप्सम फायदे क्या है जाने कब एवं कितनी मात्रा में जिप्सम का प्रयोग करें । उत्पादन बढ़ाने में है सहायक

ये भी जाने 👉Top Paddy variety : कम पानी में अधिक उत्पादन देती है ये धान की 3 बेस्ट किस्में जानें सूखे क्षेत्र में कोन सी किस्म लगाए

 

Exit mobile version