Brinjal farming | बंपर उत्पादन एवं लाभ के लिए करें बैंगन की खेती, मिलेगा 10 लाख से अधिक लाभ, जानें इसकी खेती की संपूर्ण जानकारी

Brinjal farming in India | किसान साथियों वैसे तो आमतौर पर भारत में परम्परागत तौर पर खेती की जाती है, यानि प्रमुख फसलों के रूप मे खाद्य पदार्थ और तिलहन फसल, परंतु किसान सब्जियों की खेती से ओर भी अधिक पैदावार लेकर अच्छा मुनाफा कमा सकते है, ऐसा देश के कई किसान कर रहे है जो इस समय अच्छा लाभ भी कमा रहे है।

बैंगन की खेती की बात करें तो सारा साल चलने वाली खेती है, इस समय पढ़ें लिखे लोग एवं नौकरीपेशा लोगों द्वारा भी इस नौकरी छोड़कर आधुनिक खेती में इंटरेस्ट दिखा रहे हैं, एवं अच्छा लाभ भी कमा रहे है। बैंगन की खेती साल में 6 से 8 महीना अपनी पैदावार देने में सक्षम हैं, वही प्रति हैक्टेयर उत्पादन से तक़रीबन 10 लाख रुपए की पैदावार आसानी से प्राप्त की जा सकती है,

साल भर करें बैंगन की खेती । Brinjal farming

इस समय नौकरी की कमी चारों तरफ देखने को मिल रही है यानी सभी देश के युवा नौकरी नहीं ले पाते ऐसे में अच्छी कमाई के लिए साथी इस प्रकार की खेती से अच्छा लाभ कमा सकते हैं यानी नौकरी की जरूरत ही नहीं रहेगी बल्कि नौकरी से कहीं ज्यादा यह बिजनेस करके लाभ कमा सकते हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए ही अधिकतर युवा आधुनिक एवं वैज्ञानिक तरीका अपनाकर इस और बढ़ रहे है और इसे बिजनेस के तौर पर खेती कर रहे हैं। इस प्रकार खेती से प्रति महीना लाखों रुपए का लाभ कमा सकते हैं, आधुनिक खेती से किसान सारा साल पैदावार भी ले सकते हैं।

बैंगन की इस समय अनेक प्रकार की किस्में है जो अलग अलग मौसम के अनुसर लगाई जा सकती है, यानि इन किस्मों को मौसम के अनुसार लगाकर 12 महीना पैदावार ले सकते हैं। वही बैंगन की खेती मोटा मुनाफा देने वाली है, हालांकि अपने क्षेत्र में बैंगन की कौन सी किस्म की मांग एवं बिक्री ज्यादा है उसके अनुसार पहले जानकारी लेकर ही उस समय की मांग के अनुसार ही बुवाई करें ताकि उस क्षेत्र में आसानी से यह फसल बिक जाए।

बैंगन की खेती का बुवाई का समय

साथियों बैंगन उगाने हेतु अलग अलग समय होता है शीतकालीन बैंगन की बुवाई की बात की जाए तो इसकी बुवाई जुलाई अगस्त माह, गर्मी के मौसम के लिए जनवरी एवं फरवरी, ओर वर्षाकालीन बैंगन की खेती हेतु अप्रैल मई माह में इसकी रोपाई की जा सकती है। इसकी अधिक पैदावार हेतु पौधे की दूरी उचित होनी आवश्यक है।

बैंगन की खेती कैसे करें?

किसान साथियों बैंगन की कृषि Brinjal farming को रबी एवं खरीफ दोनों सीजन में की जा सकती है, इसके अलावा इसकी खेती को मिश्रित खेती के रूप में भी की जा सकती है, अधिक पैदावार हेतु बीज का रोपण सही तरीके से करना चाहिए, प्रत्येक पौधे के बीज समान दूरी रखे। 2 पौधो एवं 2 कतारों के बीच 60 सेंटीमेंटर की दूरी रखनी चाहिए। बुवाई से पहले कम से कम 4 से 5 बार अच्छे से जुताई आवश्यक है, एवं भुमि समतल हो। प्रति एकड़ में 300 से 400 ग्राम की मात्रा में बीज डालना चाहिए। एवं बीज को 1 सेंटीमीटर नीचे मिट्टी में ढकना चाहिए। इसके बाद यह बैंगन की फसल 2 माह बाद उत्पादन देने लग जाएगा।

 

बैंगन में जितनी सिंचाई करें?

Brinjal farming | अधिक पैदावार के लिए बैंगन की खेती में उपयुक्त मात्रा में पानी देने की आवश्यकता होती है यदि गर्मी का मौसम हो तब इसमें तीन से कर पानी देना आवश्यक है जबकि सर्दियों के मौसम में 12 से 15 दिन के अंतराल के बाद पानी देना चाहिए जिससे कोहरे एवं सर्दी से इसका बचाओ किया जा सके क्योंकि मिट्टी में नमी बनी रहेगी तो इस प्रकार की समस्या नहीं आएगी इसके अलावा पानी की मात्रा इस प्रकार दें ताकि अपनी एक जगह इकट्ठा ना हो क्योंकि बैंगन की खेती में खड़े रहने से पानी से फसल नष्ट भी हो सकती है।

बैंगन की खेती में इतनी आएगी लागत

बात करें बैंगन की खेती में लागत की तो पहले हार्वेस्टिंग तकरीबन ₹200000 तक का खर्चा आ जाता है वहीं इसके रखरखाव हेतु पूरे साल में तकरीबन ₹200000 और खर्च हो जाते हैं, यानी पूरे साल की बात करें तो बैंगन की खेती में प्रति हेक्टेयर के हिसाब से तकरीबन 4 लाख रुपए का खर्चा हो जाता है। इसके अलावा उत्पादन की बात करें तो इससे 100 टन प्रति हैक्टेयर उत्पादन लिया जा सकता है।

बैंगन की खेती से सालभर में कितना लाभ होगा?

Brinjal farming | बैंगन की मार्केट में एवरेज क़ीमत की बात करें तो तकरीबन 10 रूपए प्रति किलो मानकर चले तब भी इससे कुल 10 लाख रुपए की बिक्री की जा सकती है, यानि 4 लाख खर्चा हटाकर लाभ देखे तब हम 6 लाख रुपए तक मुनाफा कमा सकते हैं।

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Conclusion: किसान साथियों यह एक सामान्य जानकारी आपके साथ सांझा की गई है, अपनी आवाज द्वारा मीडिया ग्रुप एवं अन्य प्रचलन जानकारियां इकट्ठी करके सरल एवं साधारण शब्दों में आप तक पहुंचाई गई हैं , ताकि आप इसका लाभ ले सकें। अपनी आवाज किसी भी जानकारी की पुष्टि नहीं करती मार्केट एवं एक्सपर्ट से राय लेकर ही खेती करें। धन्यवाद

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