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Potato crop insects: आलू की फसल में ठंड से रोगों का खतरा, जानें आलू के प्रमुख रोग एवं बचाव के उपाय

Potato crop insects : इस समय आलू की फसल की बढ़वार को ध्यान में रखते हुए किसान रोगों से बचाव हेतु कई उपाय कर सकते हैं। कड़कड़ाती ठंड के समय आलू की फसल में कई प्रकार के रोग होने का खतरा बढ़ गया है, यदि किसान शुरुआती लक्षण के समय ही इनको समझकर उपाय कर लेते हैं तो अच्छा उत्पादन ले सकते हैं.

Potato crop insects and prevention: ठंड में आलू के रोग एवं उपाय..

 

How we can do Potato Crop Prevention: इस समय कई स्थानों पर भारी बारिश एवं ओलावृष्टि हुई है, एवं ठंड के कारण आलू की फसल हेतु मौसमी परिवर्तन, कोहरा, एवं कम होते तापमान के कारण कई प्रकार के रोग एवं कीट नुकसान कर सकते हैं, यदि इस समय फसल में होने वाले रोगों का समय पर समाधान नहीं किया गया तो उत्पादन पर असर देखने को मिल सकता है, इसके लिए किसानों को फसल सुरक्षा के उपाय एवं सावधानी बरतनी अति आवश्यक है, हाल ही में कृषि जानकारों ने इनके रोग एवं आलू में रोग से बचाव के उपाय बताए है..

 

आलू की फसल में सर्दियों में होने वाले प्रमुख रोग इस प्रकार हैं.

1. लाही कीट यानी झंझा रोग

आलू में होने वाला झंझा रोग प्रमुख रूप से आलू की पतियों में छेद करने में सक्षम हो है, इसका अन्य नाम लाही कीट भी है, यह रोग आलू के अलावा रवि की फसल सरसों एवं अन्य फसलों की पतियों में भी नुकसान करने में सक्षम है।

 

2. आलू में माहु रोग

आलू का महू रोग इस फसल के अलावा मसूर की फसल को भी नुकसान पहुंचाने में सक्षम है, यह रोग झंझा कीट की बजाय छोटे आकर का होता है, जो पौधे को कमजोर करके उसकी वृद्धि को रोक सकता है।

 

3. आलू में पाला लगना

मौसम में परिवर्तन एवं गिरते तापमान और भयंकर ठंड के चलते आलू के पौधे कमजोर हो जाते हैं एवं पतियां पिली पड़ने लगती है इसके कारण पौधा झुलस जाता है और वृद्धि पूर्ण रूप से रुक जाती है जो उत्पादन को प्रभावित करती है।

ये है आलू की पैदावार में कमी के कारण

आलू की पैदावार को प्रभावित करने में कई प्रकार के कारक महत्वपूर्ण होते हैं, जैसे पाला पड़ना, कीट रोग, पौधे का झुलसना, पानी की उचित मात्रा की कमी एवं ऊर्वरक की मात्रा, जिसके बारे में किसानों को ध्यान देना अति आवश्यक है..

1) आलू में पाले का प्रभाव: ठंड के चलते पौधे काफी मात्रा में कमजोर हो जाते हैं जिसका प्रभाव यह होता है कि आलू का आकर भी छोटा होने लगता है और उत्पादन को कमजोर कर देता है।

2) पौधे से पौधे की दूरी: आलू के किसान बुवाई के समय विशेष ध्यान दे की आलू की बुवाई के समय पौधे से पौधे की दुरी एवं पंक्ति से पंक्ति से उचित दूरी रखे क्योंकि पर्याप्त दूरी नहीं होने के कारण पौधा अपना फैलाव अच्छे से नहीं ले पाता एवं रोग भी अधिक लगते हैं।

आलू में रोगों से बचाव हेतु उपाय?

Potato crop insects : किसान साथियों आपको बता दें कि आलू में सर्दी के समय 2 प्रकार के रोग ज्यादा देखे गए हैं, झंझा और माहु कीट, इनके नियन्त्रण हेतु किसान साथी समय समय पर कीटनाशक दवाओं का उचित मात्रा में पानी में घोलकर छिड़काव करके कीट एवं रोगों पर नियन्त्रण किया जा सकता है.

पाले से बचाव हेतु करे उपाय.

झंझा और माहु कीट के अलावा पाला पड़ना भी काफी फसल को नुकसान देता है, इसके लिए किसान साथी ठंड के समय हल्के गुनगुने पानी का पतियों पर छिड़काव कर सकते हैं, इसके अलावा हल्का हल्का पानी सिंचाई के रूप में भी दे सकते हैं, जिसके कारण फिर से पौधे हरे हो सकते हैं।

आलू की फसल में सावधानियां:

किसान साथियों को सलाह दी जाती है कि बुवाई के समय आलू के पौधों के बीच उचित दूरी अवश्य रखे, इसके अलावा समय समय पर खेत में निरीक्षण करे एवं फसल में रोग (Potato crop insects ) एवं कीट दिखाई दे तभी कृषि विशेषज्ञों से राय लेकर उनसे बचाव हेतु उचित दवाओं का इस्तेमाल जरूर करें ताकि फसल को बचाया जा सके।

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निष्कर्ष: साथियों www.apniaawaj.in पर आज के लेख में दी गई जानकारी सामान्य रूप से उपलब्ध करवाई गई है, जो आलू की फसल उत्पादक राज्यों में किसानों से सलाह लेकर आप तक सरल भाषा में उपलब्ध करवाई गई है, हालांकि किसी भी प्रकार की जानकारी के लिए आप कृषि विभाग से संपर्क कर सकते हैं।

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