ये हैं खेती में जिप्सम के फायदे: किसान साथियों कृषि कार्य करते समय अनेकों प्रकार की खाद का इस्तेमाल किया जाता है, जैसे डीएपी, यूरिया, जिप्सम, फॉस्फोरस, सल्फर, एवम जैविक खादे आदि इस्तेमाल की जाती है। यानी इस समय अधिक पैदावार हेतू किसान अनेक प्रकार की खाद का उपयोग कर रहे हैं। जिसमे जिप्सम का इस्तेमाल खेती में कब प्रयोग करें एवम कितनी मात्रा में इस्तेमाल करे और इसके क्या क्या फायदे है आज के इस लेख में हम आपके साथ सांझा करने वाले है।
खेती में जिप्सम के क्या है फायदे । What is the benefits of jipsim in agriculture farming
कृषि करते समय अनेकों प्रकार के खाद का इस्तेमाल किया जाता है, जिसमें जिप्सम का प्रयोग काफ़ी महत्वपूर्ण है। किसान भाईयो खेती बाड़ी में जिप्सम या मिट्टी सुधारक का उपयोग करते समय सबसे पहले मिट्टी की जांच जरूर करवा ले, भूमि की जांच करने के बाद ही आवश्यकता के अनुसार ही जिप्सम का आधा भाव गाय के गोबर के साथ मिलाकर पहली साल एवम दूसरी साल बचा हुआ भाग खेत में डाल सकते है। इसके अलावा 1 फीसदी मात्रा सोडियम डाल सकते है।
मिट्टी की उपजाऊ शक्ति बढ़ाने हेतु किसान भाई अनेक प्रकार की खाद का इस्तेमाल करते हैं ताकी मिट्टी की गुणवत्ता एवं फसल की पैदावार बढ़ा सके। इस समय अधिक पैदावार लेने के लिए किसान जैविक एवं रासायनिक खाद का इस्तेमाल कर रहे हैं, यदि किसान मिट्टी की उपजाऊ शक्ति एवं अधिक पैदावार लेना चाहते हैं तो जिप्सम का इस्तेमाल कर सकते है, इस हेतू किसान किन बातों का ध्यान रखें चलिए जानते है…
जिप्सम क्या है?
जिप्सम भूमि की उर्वरकता शक्ति बढ़ाने वाली प्रमुख खाद है जिसके अंदर सल्फर की मात्रा 18.6 फीसदी, कैल्शियम की मात्रा 23.3 फीसदी, कैल्शियम कार्बोनेट के अतिरिक्त 76 फीसदी जिप्सम की मात्रा 76 फीसदी तक होती है। इसका इस्तेमाल मिट्टी की उपजाऊ शक्ति बढ़ाने हेतु किया जाता है।
ऐसे काम करता है भूमि में जिप्सम
Use of jipsum in agriculture farming.जिप्सम उर्वरक मिट्टी में डालने से मिट्टी में जिप्सम नमक (salt) के साथ प्रक्रिया करता है, जिसके चलते सोडियम एवं कैल्शियम ऑक्साइड बनता है जो सोडियम सल्फेट घुलनशील होने के चलते मिट्टी में पानी की निकासी होती है। ,एवम मिट्टी का pH मान नियंत्रित रखता है, जिसके कारण मिट्टी की उपजाऊ शक्ति बनी रहती है।
खेती में जिप्सम का सही इस्तेमाल कैसे करें
खेती में जिप्सम का इस्तेमाल करते समय किसानों को सबसे पहले मिट्टी की जांच करवाना जरूरी होता है, यानि जिप्सम का इस्तेमाल कृषि विभाग की हिदायत के अनुसार ही करे। ऊपर दिए गए मात्रा के अनुसार डालने के बाद ही रोटावेटर की सहायता से मिट्टी में सही तरीके में मिला दे। इसके बाद किसान भाई कम से कम 20 सेंटीमीटर मिट्टी में मिला दे।
क्या क्या फायदे है खेतों में जिप्सम डालने के जाने
खेतों में सल्फर कैल्शियम की ज़रूरतें पूरी करता है, जो पौधे में वर्दी करने के लिए सहायक होता है इसके अतिरिक्त जिप्सम में सल्फर की उपस्थिति के चलते रोग नियंत्रण भी होता है वही तिलहनी फसलों में तेल की मात्रा को बढ़ाने में भी जिप्सम काफी मददगार होता है जमीन में जिप्सम के प्रयोग से फास्फोरस पोटाश नाइट्रोजन एवं कैल्शियम और सल्फर की मात्रा बढ़ती है जिसके कारण उत्पादन भी बढ़ता है। खेती में जिप्सम के और भी अनेक फायदे हैं, जो उत्पादन को बढ़ाते हैं।





