Maize cultivation: किसान साथियों जैसा कि मक्के की खेती खरीफ एवं रबी सीजन यानि दोनों में आसानी से की जा सकती है, भारी लाभ एवं नकदी फसल के रूप में अब किसान मक्के की खेती करने लगे हैं, हालांकि पहले इसकी खेती पारंपरिक तरीके से करते थे एवं अधिक लाभ से वंचित हो जाते थे, अधिकतर फसल पहले पशुओं के चारे या फिर आम जरूरतों के लिए ही करते थे, परंतु अब किसान आधुनिक एवं उन्नत किस्मों के जरिए मक्का की खेती करके भी अच्छा लाभ कमा रहे हैं।
किसान मक्के की खेती से ले रहे बंपर लाभ
मक्का की खेती अब आधुनिक एवं उच्च लाभ प्रदान लेने हेतू की जाने लगी है, किसान मक्के की कृषि करके भी अच्छी आमदनी ले रहे हैं, क्योंकि इस समय मक्के की मांग मार्केट में लगातार बढ़ रही है, किसान मक्के की कृषि आसानी से गर्मी एवं बारिश के समय भी कर सकते हैं एवं उच्च उत्पादन भी कर सकते हैं। किसान मक्के की खेती से कम समय में भी उच्च पैदावार ले सकते हैं, जैसा कि आपको पता है कि गर्मी के समय मक्का की कीमत भी अन्य मौसम की बजाय अधिक कीमत पर बिकता है।
ऐसे ही एक किसान जो मक्के की खेती करते है जिनका नाम सत्यनाम जो बाराबंकी के किसान है, वह गेहूं एवं धान की खेती छोड़कर अब मक्के की बीते कई साल से कर रहे हैं, हालांकि बाराबंकी जिला मुख्य रूप से मेंथा की खेती हेतु प्रसिद्ध है, फिर भी उन्होंने बताया कि वही प्रत्येक वर्ष 2 एकड़ में कई सालों से मक्का खेत में उगाते है, जिसके कारण इसकी फसल से प्रत्येक फसल में इस समय 60 से लेकर 70 हजार तक की कमाई कर लेते हैं।
किसान का कहना है कि इस समय उनके अलावा कई किसान और भी इस क्षेत्र में है जो अब धान एवं गेहूं की बजाय बीते 2 से 3 सालों में मक्के की खेती करने लगे हैं जिसके कारण अच्छा लाभ भी ले रहे हैं, इस वर्ष उक्त किसान ने कुल 2 बीघे में मक्के की देशी किस्म की बुवाई की, क्योंकि देशी मक्के की किस्म की बुवाई काफी लाभदायक है, अधिकतर लोग देशी मक्के के भुट्टे खाने हेतु ज्यादा पसंद करते हैं।
किसान कम खर्चा यानि 5 से 6 हजार लगाकर 60 से 70 हजार रुपए प्रति फसल तक मुनाफा ले सकते हैं, यानि यह फसल अब फायदे का सौदा साबित हो रही है। फसल तैयार होने में भी बहुत कम समय लेती हैं यानि सिर्फ 80 से 90 दिन । किसान बुवाई से पहले 2 बार जुताई करें, एवं उसमें गोबर की खाद का इस्तेमाल करके, मक्के की बुवाई कर सकते हैं।
किस समय करे मक्के की बुवाई
हालांकि मक्के की खेती का समय साल में 2 बार आता है 1. गर्मी के मौसम में एवं 2. बरसात के मौसम में, परंतु इस समय आप यदि मक्के की कृषि करना चाहते हैं तो आप 15 जून से 15 जुलाई के बीच उच्च क्वालिटी की मक्के की किस्म का इस्तेमाल करके बेहतर उत्पादन ले सकते हैं। बीज के लिए आप 8 किलोग्राम का इस्तेमाल प्रति एकड़ कर सकते हैं। बुवाई करते समय पौधे से पौधे की दूरी 20 सेमी एवं लाइन से लाइन की दूरी 60 सेमी रखना उपयुक्त है।
मक्के पर किसानों को मिल रहा एमएसपी की गारंटी
किसानों का रुझान अब मक्के की और बढ़ने का एक कारण यह भी है कि इस समय उतर प्रदेश सरकार द्वारा किसानों को मक्के का समर्थन मूल्य की गारंटी भी दी जा रही है, विपणन वर्ष 2025- 26 हेतू सरकार ने मक्के का समर्थन मूल्य (maize msp price) 2225 रूपए रखा। मक्के की समर्थन मूल्य पर खरीद 15 जून से 31 जुलाई तक उतर प्रदेश के कई जिलों के किसानों से करने जा रही है, जिसका लाभ इस क्षेत्र के किसानों को मिलेगा।
मक्के के आम जिंदगी में है कई उपयोग
आम लोगों की जिंदगी हो या फिर औद्योगिक क्षेत्र, सभी क्षेत्र में मक्के की उपयोगिता से इनकार नहीं किया जा सकता, मक्के का उपयोग इस समय सबसे अधिक पोल्ट्री सेल्टर में भारी मात्रा में है, इसके अलावा अन्य उपयोग जैसे, बेबीकॉर्न, पॉपकॉर्न , मक्के का आटा एवं खाने हेतु भुट्टा आदि शामिल हैं, इसके अलावा भी मक्के के कई उपयोग हैं, पेपर दवा एवं अल्कोहल इंडस्ट्री में भी इसका काफी प्रयोग होता है।





