Black cumin variety: काला जीरा (जीरी) की किस्म है बड़े काम की, जाने कैसे करे इसकी खेती, एवं खाद बीज ऊर्वरक की जानकारी

Black cumin variety : काली जीरी की किस्म मुख्यत एक औषधीय फसल के रूप में कृषि की जाती है, इसके कई प्रकार के औषधीय गुण होने के कारण इस समय इसकी खेती काफी पॉपुलर हो गई है, क्योंकि इसकी मार्केट में मांग भरपूर है एवं मांग के चलते यह मार्केट में अच्छे दामों में बिक्री हेतु उपलब्ध है।

इस Black cumin variety का पौधे का आकार काफी छोटा होता है, हालांकि इसका स्वाद कड़वा महसूस होता है, क्योंकि अधिकतर औषधीय पौधे स्वाद में कड़वे परंतु बहुत गुणकारी होता है। काला जीरा (काली जीरी) का इस्तेमाल इस समय कई प्रकार की औषधि बनाने हेतू की जा रही है, क्योंकि इसकी तासीर गर्म रहती है, हालांकि यह ऊपरी तौर पर देखने पर सामान्य जीरे की तरह ही दिखाई देता है, परंतु इसका रंग काला होता है।

भाषाओं के अनुसार इसके कई नाम प्रचलित हैं, जैसे कि इंग्लिश में Black cumin seed, संस्कृत भाषा में इसको कटुजीर एवं अरण्यजीरक आदि नामों में बोला जाता है, वही मराठी भाषा में इसको मुख्यत कडूजीरें के रूप में जाना जाता है। वही गुजराती भाषा में इसको कालीजीरी ही कहा जाता है।

दूसरी और लैटिन भाषा में इसका नाम वर्नोनिया एन्थेल्मिंटिका रखा गया है। यानि अलग अलग भाषा एवं क्षेत्र के मुताबिक अलग अलग नाम होते हैं। ऐसे में आइए आज के इस लेख में हम इसकी खेती के बारे में संपूर्ण जानकारी आपको देते हैं..

Black cumin variety | काली जीरी हेतु उपयुक्त जलवायू एवं मिट्टी?

काली जीरी (Black cumin variety) की खेती के लिए उपयुक्त जलवायू एवं मिट्टी अति आवश्यक है, इसकी खेती हेतु साल के अधिकतर उन क्षेत्रों में की जाती है जहां जलवायू ठंडी हो, क्योंकि इसका पौधा अधिक ठंड को ऑब्जर्व करता है एवं बढ़वार भी बेहतर होती है, जो उत्पादन में बढ़ोतरी हेतु उपयुक्त है। किसान इसकी खेती रबी सीजन में कर सकते हैं।

हालांकि बुवाई एवं बढ़ोतरी के समय इसकी खेती के लिए ठंडी उपयुक्त जलवायू मानी जाती है, परंतु इसकी बीज एवं पकते समय में गर्मी अति आवश्यक होती है, इसकी Black cumin variety खेती हेतु सभी प्रकार की मिट्टी उपयुक्त है, यानि सभी प्रकार की मिट्टी में इसको उपजाया जा सकता है, परंतु सबसे अधिक पैदावार हेतु किसान इसकी खेती अच्छी जल निकासी, रेतीली एवं दोमट मिट्टी में कर सकते हैं। इस प्रकार की मिट्टी में इसकी खेती अन्य मिट्टी की बजाय अधिक पैदावार देती है।

Black cumin variety | काले जीरे की ये है उन्नत किस्में

किसी भी फसल की उचित एवं अधिक पैदावार हेतु सबसे पहले उपयुक्त मिट्टी एवं जलवायू अनुकूल होनी चाहिए उसके बाद सबसे अधिक प्रभाव उसकी किस्मों के चुनाव पर खेती निर्भर करती है, तो चलिए इसकी उन्नत किस्में कौन सी हैं, जानते हैं..

  • स्टैंग जीरा किस्म (2.1)
  • बारंग जीरा किस्म (1.3)
  • सनजी जीरा किस्म (1.9)
  • रिस्पा जीरा किस्म (2.0)
  • कनम जीरा किस्म (2.4)
  • किल्बा जीरा किस्म (1.7)
  • रिब्बा जीरा की किस्म (1.8)
  • सिंगला जीरा किस्म (2.3)
  • तेलंगी जीरा किस्म (1.4)
  • थंगी जीरा किस्म (1.9)
  • लोबसांग जीरा किस्म (2.1)
  • माईबर जीरा किस्म (2.4)
  • रोजी जीरा किस्म (1.5)
  • कोठी जीरा किस्म (1.8) आदि।

काले जीरे की खेती हेतु भूमि की तैयारी.

Black cumin variety । किसान सबसे पहले पिछली फसल के सभी प्रकार के अवशेष एवं कीट पतंग को हटा दें, उसके बाद काले रंग की कृषि हेतू सबसे पहले खाली खेत में अच्छे से जुताई करना आवश्यक है, इसकी जुताई किसान भूमि में 2 से 3 बार हैरो या फिर देशी हल के माध्यम से इस प्रकार कर की मिट्टी भुरभुरी बन जाए। खेत के सभी प्रकार की ऊंची नीची जगह को समतल कर देवे।

बुवाई से पहले किसान 4 मीटर × 3 मीटर आकार के बेड बनाकर सिंचाई की नालियों का प्रावधान करना चाहिए ताकि भूमि में उपयुक्त मात्रा में जल पहुंच सकें, एवं इसके कारण खेत में उचित सिंचाई और अंतर-कल्चर संचालन में सहूलियत हो। जिससे अधिक पानी खेत में खड़ा ना रहे।

काले जीरे की खेती हेतु बुवाई का उपयुक्त समय एवं बीज मात्रा ?

Black cumin variety | काले जीरे की खेती प्रमुख्त रबी सीजन की फसल है, इसकी बुवाई का उपयुक्त समय एक नवंबर से 20 नवंबर तक माना जाता है। इसके अलावा जो किसान दिसंबर के पहले सप्ताह तक इसकी बुवाई करते हैं वह 30 cm की पंक्तियों में कर सकते हैं, किसान इसकी खेती के लिए प्रति हैक्टेयर भूमि में 12 से 15 किलोग्राम का इस्तेमाल कर सकते हैं। किसान इस बात का विशेष ध्यान रखे कि बुवाई से पहले बीज उपचार जरूर करे। किसान बुवाई से पहले इसके बीजों को सेरेसन, थिरम या डिफोल्टन @ 3.0 ग्राम प्रति किलोग्राम से उपचारित करना बिल्कुल भी नहीं भूले।

जीरे की खेती हेतु खाद एवं बीज की मात्रा?

किसान इसकी खेती हेतु उपयुक्त मात्रा में खाद बीज का इस्तेमाल करें, बुवाई से पहले किसान देशी खाद ( गोबर खाद) 15 से 20 टन, नाइट्रोजन की मात्रा 30 किलोग्राम एवं फॉस्फोरस की मात्रा 15 किलोग्राम प्रति हैक्टेयर के अनुसार कर सकते हैं। किसान देशी खाद की संपूर्ण मात्रा को एक साथ ही दे, जबकि किसान बेसल डोज के रूप में नाइट्रोजन एवं फॉस्फोरस खाद इस्तेमाल करें। वही बीज के अंकुरण के 30 दिन बाद नाइट्रोजन 15 किलोग्राम टॉपड्रेसिंग के रूप में दे।

काले जीरे की खेती हेतु सिंचाई की उपयुक्त मात्रा

Black cumin variety| जीरे की खेती में मिट्टी के अनुसार ही सिंचाई देनी चाहिए, हालांकि 4 से 6 पानी इसके लिए उपयुक्त है, किसान पहली सिंचाई इसमें बुवाई के समय दे, वही इसके 6 से 12 दिन बाद दूसरी सिंचाई दे। इसके बाद किसान इसमें सिंचाई क्रमवार 30,45,65 एवं 80 दिन बाद दे सकते है, किसान इस बात का ध्यान जरूर रखे जिस समय फल फूल बने तो सिंचाई अवश्य दे, जबकि पकते सा इसकी सिंचाई बंद कर दें।

 

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