Disease in wheat crop: किसान साथियों जैसा कि गेहूं की बुवाई के बाद पहली एवं दूसरी सिंचाई का कार्य शुरू हो चुका है, एवं साल के अंतिम सप्ताह एवं नए साल 2025 के पहले चरण की शुरुआत हो रही है, ऐसे में गेहूं इस समय पहले स्टेज में होती है, जिसके कारण इस समय कई प्रकार के रोग गेहूं में फैलने का खतरा बना रहता है।
Disease in wheat crop : गेहूं में रोग का खतरा
गेहूं की फसल में इस समय सबसे अधिक रोग की बात करें तो यह फुट रॉट रोग काफी ज्यादा देखने में आता है, जिसका परिणाम यह होता है कि गेहूं की जड़ खराब होने लगती है, एवं गेहूं के पौधे की पतियां काले रंग के धब्बे के साथ साथ भूरे रंग के धब्बे बनने लगते हैं एवं पतियां सूखने लगती है, जो फसलों को बर्बाद कर देते हैं।
गेहूं में इस रोग के प्रकोप के बारे में हाल ही में गढ़वाल विश्वविद्यालय के उद्यानिकी विभाग के कृषि एक्सपर्ट ईश्वर सिंह ने जानकारी दी है, उनका कहना है कि इस समय गेहूं 2 महीने से अधिक की हो चुकी है , इसमें गेहूं फुट रॉट रोग का प्रकोप होने का सबसे अधिक खतरा बना हुआ है, इस रोग के खतरे को जानने के लिए प्रमुख लक्षण एवं इसमें कौन सी दवाई का इस्तेमाल करें , इस लेख में हम विस्तार से जानेंगे ताकि किसानों को इस प्रकार के रोग से बचाव हेतु समय पर उपाय का लाभ मिल सके
गेहूं में फूट रॉट रोग के लक्षण क्या है?
Disease in wheat crop : इस रोग के लक्षणों के बारे में कृषि विशेषज्ञ श्री ईश्वर सिंह ने बताया कि इस रोग की वजह से गेहूं की जड़े प्रमुखत खराब होना शुरू हो जाती है, जिसके बाद गेहूं के पौधे की जड़ों से काले रंग एवं भूरे रंग के धब्बे दिखाई देने लगते हैं, इसके अलावा गेहूं की पतियों पर काले एवं भूरे रंग के धब्बे होने शुरू हो जाते हैं, जिसके चलते गेहूं की फसल में काफी नुकसान होता है, यहां तक कि खेत में खाली जगह दिखाई देने लगती है।
गेहूं में रोग से बचाव हेतु कौन सी दवाई डालें?
Disease in wheat crop : फूट रॉट रोग से गेहूं के पौधे को बचाने हेतु किसान 250 ग्राम कॉपर ऑक्सिलराइड (coper oxicloride) को 100 लीटर पानी की मात्रा में घोलकर स्प्रे के रूप में प्रति हैक्टेयर क्षेत्र में करें। फसल को पूर्ण रूप से रोग मुक्त हेतु किसान पौधे की पतियों सहित जड़ तक ऐसे छिड़काव करें ताकि कोई भी स्थान न बचे, एवं पौधा रोग मुक्त हो।
रोग मुक्त हेतु किसान 5 दिन के अंतर में करें छिड़काव
Disease in wheat crop : किसान इस फंगीसाइड का इस्तेमाल बगैर किसी चिंता के कर सकते हैं क्योंकि यह गेहूं की फसल को किसी भी प्रकार का नुकसान नहीं पहुंचता कि इस जगह का कहना है कि किस साथी इसका छिड़काव 4 से 5 दिन के अंतराल में कर सकते हैं ताकि समय-समय पर इस रोग के प्रकोप को बढ़ाने से रोका जा सके।
गेहूं में पीले पत्ते होने का कारण क्या है?
कृषि डॉक्टर कहते हैं कि सर्दी के मौसम में मिट्टी में सूक्ष्मजीव बहुत अधिक प्रभाव डालते हैं , इस दौरान सर्दी बढ़ जाती है एवं इसके साथ गेहूं में पहली सिंचाई एवं दूसरी सिंचाई होती है, जिसके चलते गेहूं के पौधे की नीचे पतियां पिली पड़ने लगती है। जो आगामी समय में फसल उत्पादकता पर अवश्य प्रभाव डालती है।
अत्यधिक ठंड के चलते गेहूं के खेत में माइक्रोबियल गतिविधि कमजोर पड़ जाती है, जिसके चलते नाइट्रोजन का उठाव कम हो जाता है। गेहूं के पौधे में मौजूद नाइट्रोजन को नाइट्रेट में परिवर्तित कर देते हैं, नाइट्रोजन की अत्यधिक गतिशीलता के चलते नीचे की पतियों से ऊपरी पतियों में चला जाता है, जिसके चलते नीचे की पतियों में पीलापन आ जाती है।
गेहूं की पतियां पिली पड़ने पर क्या करे उपाय?
Disease in wheat crop : किसान साथियों को कृषि विशेषज्ञों के अनुसार गेहूं में पीलेपन को हटाने हेतू किसान 2 प्रतिशत यूरिया यानि (20 ग्राम यूरिया प्रति लीटर) के हिसाब से खेत में छिड़काव करें, यदि अत्यधिक ठंड पड़ती है तब किसान सिंचाई समय समय पर देते रहे । इसके अलावा यदि पौधे की पतियां गिर गया है या, धब्बे दिखाई देते हैं तो किसान इसमें डायथेन एम-45 नामक फफूंदनाशक का छिड़काव कर सकते हैं। इसकी मात्रा प्रति लीटर 2 ग्राम रख सकते हैं।
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निष्कर्ष: नमस्कार किसान साथियों में राकेश कुमार कसवां, www.apniaawaj.in का संस्थापक हु, पिछले कुछ वर्षों से खेती बाड़ी, कृषि जगत, तकनीक, साइंस न्यूज़, टेक्नोलॉजी, समेत अन्य ज्वलंत मुद्दों के साथ आपके लिए लेकर आते हैं ताकि अधिक से अधिक जानकारी आपके साथ सांझा की जा सके।





