Top 3 wheat variety : रबी सीजन में इस समय धान सोयाबीन ग्वार नरमा कपास की कटाई जोर शोर से चल रही है, इसके बाद गेहूं की बुवाई का कार्य शुरू होने वाला है, ऐसे में किसान गेहूं की उच्च पैदावार वाली उन्नत किस्मों की बुआई करके अच्छा लाभ कमा सकते हैं।
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कृषि अनुसंधान संस्थान केन्द्र द्वारा अधिक पैदावार देने वाली गेहूं की नई किस्म Top 3 wheat variety विकसित की है जो अन्य सामान्य किस्मों की बजाय 20 फीसदी तक अधिक पैदावार देने में सक्षम है। व्यापारिक लाभ के साथ साथ ये किस्में खाने के लिए भी उपयुक्त साबित होंगी।
Top 3 Gehun new variety 2024 : देश के कई राज्यों में गेहूं या अन्य फसलों की बुवाई एवम् सिंचाई हेतु उपयुक्त पानी की मात्रा उपलब्ध नहीं होती, जिसके चलते गेहूं जैसी फसल की बुवाई करना संभव होता, क्योंकि उसकी फसल में अच्छी बारिश या सिंचाई की आवश्यकता पड़ती है, ऐसी स्थिति में कम पानी वाली गेहूं की बुवाई किसान कर सकते हैं, ऐसी कोन कोन सी गेहूं की नई किस्म है जो अधिक पैदावार के साथ साथ कम पानी में भी उगाई जा सकती है, एवम् इनकी क्या क्या विशेषताएं हैं, आइए जानते हैं..
ये हैं गेहूं की 3 नई उन्नत किस्में | Top 3 wheat variety
1. गेहूं की किस्म HI – 1634 (पूसा अहिल्या गेहूं किस्म)
2. गेहूं की किस्म HI – 1650 (पूसा ओजस्वी गेहूं किस्म)
3. गेहूं की किस्म HI – 1636 (पूसा बकुला गेहूं किस्म)
आइए जानते हैं इन 3 गेहूं की किस्मों की विशेषताएं क्या है.
1. गेहूं की किस्म HI – 1634 (पूसा अहिल्या गेहूं) की विशेषताएं.
New Top 3 wheat variety : गेहूं की किस्म HI – 1634 को साल 2021 में कृषि अनुसंधान संस्थान इन्दौर द्वारा विकसित किया गया था, इस गेहूं की किस्म पूसा अहिल्या की बुवाई राजस्थान, मध्य प्रदेश, गुजरात छत्तीसगढ़ आदि क्षेत्रों में उपयुक्त मानी गई है। यह गेहूं की किस्म चपाती एवम् बिस्किट बनाने हेतु उपयुक्त है।
गेहूं की यह किस्म HI – 1634 अन्य सामान्य किस्म की बजाय 15 से 30 फीसदी अधिक पैदावार मानी जा रही है। उच्च तापमान एवम् प्रतिकूल परिस्थितियों को सहन करने के कारण अन्य किस्मों की बजाय अच्छी पैदावार देगी, प्रति एकड़ के हिसाब से इसका उत्पादन 30 क्विंटल एवम् प्रति हैक्टेयर के हिसाब से ये किस्म 70 क्विंटल से अधिक उत्पादन दे सकती है।
क्या है गेहूं की किस्म HI – 1634 की खास विशेषता
गेहूं की इस नई किस्म की बात करें तो यह किस्म अधिक तापमान में भी जल्दी नहीं पकती जिसके कारण इसके उत्पादन पर भी कोई असर नहीं होता, जिसका प्रभाव इसके उत्पादन पर सीधा देखने को मिलता है और अन्य किस्मों की बजाय 20 फीसदी तक पैदावार अधिक देती है। क्योंकि देखा गया है कि फरवरी 15 के बाद तापमान में वृद्धि होती है, जो गेहूं के उत्पादन पर असर डालती है। Top 3 wheat variety
गेहूं की किस्म पूसा अहिल्या Top 3 wheat variety को अगेती किस्म माना जाता है, जो पकने में तकरीबन 110 से 115 दिन तक लेती है। इस गेहूं की किस्म को दिसंबर माह में बोने के लिए उपयुक्त समय माना गया है, किसान इसकी कटाई करके अगेती आलू मटर जैसी फसल की बुवाई भी कर सकते हैं। इस किस्म में किसान 2 से 3 सिंचाई करके भी अच्छा मुनाफा ले सकते हैं।
यह किस्म सामान्य गेहूं की किस्मों की बजाय हाईट में कम यानी 80 से 85 से. मीटर तक ही बढ़ती है, जिसके कारण आंधी तूफान में भी आड़ी (गिरने की संभावना) भी काफी कम हो जाती है, इस किस्म के दाने के वजन की बात करें तो 1000 दाने का वजन 40 से 50 ग्राम तक होता है। इस किस्म में कई प्रकार के रोग जैसे – कर्नाल बंट, स्टेम रस्ट, लीफ ब्लाइंट एवम् लूज स्मत आदि के प्रति सहनशील है।
2. गेहूं की नई किस्म HI – 1650 (पूसा ओजस्वी गेहूं)
Top 3 wheat variety : गेहूं की यहनई किस्म HI 1650 अन्य नाम पूसा ओजस्वी के नाम से भी महसूर है, इस किस्म को विकसित करने में काफी मेहनत एवम् अथक परिश्रम के साथ कृषि वैज्ञानिक द्वारा किया गया है, काफी शोध के बाद ही इस किस्म पूसा ओजस्वी को मध्य भारत में बुवाई हेतु उचित मानी गई है, यह किस्म काफी पोष्टिक मानी गई है।
गेहूं की इस किस्म को भी विकसित करने का श्रेय कृषि अनुसंधान संस्थान के क्षेत्रीय कार्यालय इन्दौर को जाता है, यह गेहूं की किस्म प्रमुख रूप से गुजरात,राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, एवम् उतर प्रदेश के झांसी संभाग हेतु उपयुक्त है, इसके अलावा इस किस्म को हरियाणा के पश्चिमी हिस्से में भी बोई जा सकती है।
ये हैं गेहूं की नई किस्म HI- 1650 की खास विशेषता..
Top 3 wheat variety : गेहूं की यह किस्म HI- 1650 मध्यम आकार की ऊंचाई लेती है जो गेहूं की अन्य एक किस्म तेजस के समान है, आंधी तूफान एवम् हवा के समय गिरने की संभावना मध्यम ऊंचाई होने के कारण कम हो जाती है, इस किस्म की खास विशेषता यह है कि यह प्रति बाली 75 से 85 दाने की रहती है, जो अन्य किस्म की बजाय बेहतर पैदावार देती है, और कम लंबाई के कारण जमीन पर भी नहीं लेटती।
अगेती गेहूं की किस्म जिस किसान को करनी है वह किसान इस गेहूं पूसा ओजस्वी (HI 1650) की बुवाई नवंबर माह में कर सकते हैं, यह किस्म उच्च उत्पादन हेतु मानी गई है जो प्रति हैक्टेयर भूमि में 60 क्विंटल से 80 क्विंटल तक देने के लिए जानी जाती हैं। प्रति हैक्टेयर में बीज की मात्रा 100 किलो उपयुक्त रहेगा।
इस किस्म का दाना चमकीला एवम् कठोर होता है, 1000 दाने में इसका वजन 45 से 55 ग्राम तक रहता है, पकने में यह गेहूं की नई किस्म तकरीबन 110 /122 दिन लगता है, इस किस्म की ऊंचाई 90 से 100 सेंटीमीटर तक होती है यानी मध्यम आकार की बढ़वार लेती है। गेहूं की यह किस्म खाने में स्वादिष्ट होने के अलावा पोष्टिक भी होती है।
3. नई गेहूं की किस्म HI – 1636 (पूसा बकुला गेहूं)
New variety of wheat 2024 . गेहूँ की किस्म एच.आई. 1636 जिसे पूसा बकुला के नाम से भी जाना जाता है, इस किस्म को हाल ही में गेहूं क्षेत्रीय अनुसंधान संस्थान इंदौर द्वारा जारी किया गया है, यह किस्म गुजरात, मध्य प्रदेश के मध्य क्षेत्र,राजस्थान, छत्तीसगढ़ एवम् आसपास के क्षेत्र के लिए उपयुक्त मानी जा रही है।
इस किस्म Top 3 wheat variety को 2021 में अधिसूचित किया गया था, इस किस्म के दाने मोटे एवम् चमकीले, आकर्षक एवम् उच्च गुणवत्ता के साथ साथ पौष्टिक एवम् स्वादिष्ट माने जा रहे हैं, यह किस्म खाने के अलावा बिस्किट बनाने में भी काफी उपयुक्त है, जो काफी पॉपुलर हो रही है।
क्या है इस गेहूं की नई किस्म HI 1636 की खास विशेषता
New wheat variety : गेहूं की किस्म पूसा बकुला की खासियत की बात करें तो यह किस्म तकरीबन 100 सेंटीमीटर तक ऊंचाई लेती है, जो प्रति 100 दानों पर वजन में 50 से 55 ग्राम तक रहता है। प्रति हैक्टेयर क्षेत्र में यह किस्म 80 क्विंटल तक पैदावार देने में सक्षम मानी जाती है।
पकने में यह किस्म तकरीबन 125 दिन से लेती है, यानी यह किस्म भी अगेती किस्म है। इस किस्म में कई प्रकार के रोग जैसे लीफ रस्ट, कर्नाल बंट, स्टेम जैसे नहीं लगते यानी रोगों के प्रति सहनशील किस्म है, यह खाने में स्वादिष्ट एवम् पोष्टिक से भरपूर किस्म है,
बीज की दर की बात करें तो गेहूं की नई किस्म में आप प्रति हैक्टेयर 135 किलो बीज एवम् 50 से 55 किलो बीज की मात्रा प्रति एकड़ भूमि में डाल सकते है m इस किस्म के दाने मोटे एवम् चमकीले, उच्च पैदावार, तापमान के प्रति सहनशील किस्म के कारण आदर्श किस्म माना जा रहा है, इस किस्म में 4 से 5 पानी की सिंचाई काफी रहती है।
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